UNMUKT

main aap sab ka swagat karta huun apne us pehlu ko aap se bantne ke liye jo barson se sabhi ke liye anjaan tha. mere nazdiki mere mitra aur meri ma shrimati SUDHA CHAUHAN ke kehne par hi main aap se rubaru ho raha hun aur yeh asha karta huun aap ise zarur sarahenge.

dhanyavaad

07 February, 2010

चलो लौट चलें


चलो आज फिर लौट कर कुछ दूर तो साथ चलें ,
छूट गए जो वक़्त की रेत में सुहाने पल उन्हें याद करें |

वक़्त सितम नहीं ढाता वो तो नादान है ,
अपनी ही भूलों को चलो आज फिर याद करें |

न तू ज़ालिम न में ही गुनाहगार ,
आज चलो हम फिर से उन टूटे सपनों के तार बुने |

अगली सुबह की भोर का एक भय भी है उत्साह भी ,
पर तू साथ चले तो बात बने , कुछ गहरे जख्मों के घाव भरें |

सूरज ढल रहा है अँधेरा बस होने ही को है ,
रात से पहले बस फिर एक बार इक दूजे का जी भर दीदार करें .

चलो आज फिर लौट कर कुछ दूर फिर साथ चलें ......

No comments:

Post a Comment